ब्रहस्पति ग्रह और रत्न पुखराज

ब्रहस्पति ग्रह को गुरु माना गया है, जो अज्ञान और अंधकार को हटा कर अपने शिष्य या आराधक को बुद्धि और विवेक प्रदान करता है। ब्रहस्पति ग्रह उपयुक्त समय पर दैवी सहायता भेज कर कष्ट से मनुष्य को मुक्ति दिलाता है।

यह ग्रह सामाजिक न्याय, धर्म गंभीरता चतुराई, गुप्तरहस्य, विज्ञान, कानून और ईमानदारी का घोतक है, इस ग्रह की दशा के चलने पर व्यक्ति चहुंमुखी विकासकरता है। ब्रहस्पति सभी ग्रहों से सबसे बड़ा है,  इस मे 13 पृथ्वीयाँसमा सकती है।

 ब्रहस्पति ग्रह और रत्न पुखराज

ब्रहस्पति ग्रह और रत्न पुखराज

ब्ब्रहस्पति सूर्य से जितनी ऊर्जा ग्रहण करता है, उस मे से 1.7 गुना अधिक ऊर्जा वापिस विकिरित कर देता है, जबकि शेष ग्रहों मे केवल वह ऊर्जा होती है, जो वह सूर्य से प्राप्त करते हैं।

ज्योतिष की दृष्टि से पुखराजगुरु ग्रह का प्रतिनिधि  रत्न है, जिन व्यक्तियों का जन्म सूर्य की धनु राशि मे अर्थात 14 दिसंबरसे 14 जनवरी तक है, उनका रत्न पुखराज है, ब्रिटिश संग्रहालय मे रखी  एक प्राचीन पुस्तक के अनुसार पुखराज को धारणकरने से यदि बुरी शक्तियों का प्रकोप है तो समाप्त हो जाता है॥

यह रत्न बुद्धि कोबढ़ाने वाला है, क्रोध और पागलपन को शांत रखने वाला है। असली पुखराज की पहचान की यह विधि बताई गयी है, इसे सफेद कपड़े मे रख कर धूप मे देखें तो कपड़े पर पीली छाई सी दिखाई देती है,। 24 घंटे दूध मे रखने के बाद भी इसकी चमक कम नहीं होती।

जहरीले जानवर द्वारा काटे गए स्थान पर असली पुखराज को लगाने से वह स्थान विष रहित हो जाताहै। ऐसे जातक जिन को पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है, यदि वह इसे खरीद न पाएँ तो इसके स्थान पर सुनेला धारण कर सकतेहैं। रत्न जगत मे पुखराज रत्न का अपना ही एक विशेष महत्व है॥ 

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